धर्म
सनातन धर्म की पुनर्स्थापना
अंतर योग गुरुकुल का मंदिर सनातन धर्म के सार को दर्शाता है
आचार्य उपेंद्रजी ने सनातन धर्म के दुर्लभ प्राचीन ज्ञान को हर भारतीय नागरिक तक पहुँचाने और इसे पुनर्जीवित करने का विशाल कार्य अपने हाथों में लिया है।
आचार्य जी पिछले २० वर्षों से हमारे प्राचीन शास्त्रों के ज्ञान का निरन्तर प्रसार कर रहे हैं।
आचार्य उपेंद्रजी अद्वैत वेदान्त के उच्चतम सिद्धान्तों को अन्य धर्मों और विश्वासों के साधकों को सिखा रहे है, जिससे वे सनातन धर्म के मूलभूत सिद्धान्तों से जुड़ रहे हैं।
इसके परिणामस्वरूप, विश्व भर में अनगिनत लोग सनातन धर्म को अपना रहे हैं, और हमारे धर्म, संस्कृती, परम्पराओं तथा पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना बढ़ रही है।
आचार्य उपेंद्रजी द्वारा स्थापित अंतर योग गुरुकुल का मन्दिर सनातन धर्म का प्रतीक है, जो सभी धर्मों का आधार है।
वर्ण
वर्ण व्यवस्था की पुनर्स्थापना से भेदभाव रहित समाज का निर्माण
आचार्य जी सभी जातियों के लोगों को प्राचीन वर्ण व्यवस्था का वास्तविक अर्थ सिखा रहे हैं और उन्हें उच्च आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर रहे हैं।
लाखों लोग वर्ण व्यवस्था के सिद्धान्तों का पालन कर रहे हैं, जिससे जाति व्यवस्था का उन्मूलन हो रहा है।
आचार्य जी कहते हैं, "जब वर्ण व्यवस्था हमारे शास्त्रों के अनुसार पुनः स्थापित होगी, तो जाति व्यवस्था से उत्पन्न सभी समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी।"
भविष्यवाणी
अगस्त्य नाड़ी ज्योतिष और अन्य गुरु आचार्य उपेंद्रजी की दिव्यता को पहचानते हैं और सम्मानित करते हैं
आचार्य जी के पास भारत को विश्वगुरु बनाने की अनोखी योजना तैयार है। यह कई आध्यात्मिक नेताओं द्वारा प्रमाणित किया गया है। अगस्त्य महर्षि नाड़ी ज्योतिष, हमारे देश के चमत्कारी परिवर्तन में आचार्य जी की महत्वपूर्ण भूमिका की भविष्यवाणी करता है।
अगस्त्य महर्षि नाड़ी ज्योतिष की भविष्यवाणियों में कहा गया है कि आचार्य उपेंद्रजी स्वयं अगस्त्य महर्षि के अवतार हैं। आने वाले वर्षों में, कई आध्यात्मिक संघठन और नेता राष्ट्र के सुधार के लिए आचार्य जी के साथ सहयोग करेंगे।
कई सन्तों ने आचार्य उपेंद्रजी की दिव्यता का अनुभव किया है और भारत के प्रति उनके असाधारण कार्यों की प्रशंसा की है।
Since his childhood, many spiritual leaders and various Naadi astrology readings have foretold that many remarkable tasks will be led and achieved only through Acharya Ji, such as:
हमारे देश भारत को विश्व गुरु और महाशक्ति के रूप में उसकी प्राचीन गौरवशाली स्थिति में पुनः स्थापित करना।
गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करके चारों वर्णों को एकजुट करते हुए जाति आधारित भेदभाव का उन्मूलन।
सनातन धर्म के प्राचीन ज्ञान को पुनर्जीवित और प्रसार करना।
शिक्षाएँ
एक जागृत गुरु जो देश में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं
आचार्य उपेंद्रजी विभिन्न गीताएँ, उपनिषद, पुराण, वेद, उपवेद, अर्थशास्त्र, ब्रह्म सूत्र, नारद भक्ति सूत्र और विभिन्न धर्मों के शास्त्रों का ज्ञान सिखाते हैं।
आचार्य जी लुप्त हुए प्राचीन ज्ञान को पुनर्जीवित कर रहे हैं और गणेश विद्या, पितृ ऋण मुक्ति, श्रीविद्या, नवरात्रि, संकल्प सिद्धि, ब्रह्मचर्य, शास्त्रोक्त दान, आहार, नवग्रह जैसे विषयों पर अद्वितीय प्रवचन दे रहे हैं।
उनके कई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रवचन, विश्व भर के साधकों को १५ दिनों से भी अधिक समय तक प्रति दिन १० घण्टे से अधिक समय तक जोड़े रखते हैं।
लाखों साधक आचार्य जी के असाधारण वक्तृत्व कौशल और विचार उत्तेजक प्रवचनों से मन्त्रमुग्ध हो जाते हैं, जो साधकों के जीवन में तुरन्त परिवर्तन लाने में सक्षम हैं।
पूर्वज
भारत के नागरिकों को उनके कुण्डली के सबसे बड़े दोष - पितृ दोष से मुक्ति दिलाना
पिछले १८ वर्षों से आचार्य उपेंद्रजी, सामूहिक स्तर पर पितरों को मुक्त करने का दिव्य कार्य कर रहे हैं। यह अद्वितीय कार्य आज विश्व भर में कहीं और नहीं किया जा रहा है।
लगभग ९०% भारतीयों की कुण्डली में पितृ दोष या पितृ ऋण होता है। इस दोष से देश के नागरिकों को मुक्त कराने के लिए, आचार्य उपेंद्रजी हर साल पितृ पक्ष के दौरान ‘अंतर योग पितृ ऋण मुक्ति शिविर’ का आयोजन करते हैं।
यह शिविर शक्तिशाली साधना और प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान का एक दुर्लभ संगम है, जो पितरों को तत्काल मुक्ति प्रदान करता है और लाखों साधकों को पितृ दोष और पितृ ऋण से मुक्त होने में सहायता करता है।
यह जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है और जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे व्यापार, वैवाहिक जीवन, सन्तान प्राप्ति, न्यायालयीन प्रकरण, स्वास्थ्य आदि में तेजी से प्रगति करने में सहायता करता है।
परिणामस्वरूप, लाखों साधक अपनी दैनिक चिन्ताओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और विश्व की सेवा जैसे उच्च उद्देश्य की ओर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।
लाखों लोगों के लिए ‘अंतर योग पितृ ऋण मुक्ति शिविर’ आयोजित करना कोई साधारण कार्य नहीं है; यह केवल दिव्य शक्ति से ही सम्भव है।
इतना ही नहीं, आचार्य उपेंद्रजी नागरिकों को काला जादू और दुष्ट शक्तियों के प्रभाव से बचाने, रक्षा करने और उससे मुक्ति दिलाने की अद्वितीय क्षमता रखते हैं, जो केवल एक ही साधना के माध्यम से सम्भव है।
फ्री प्रेस जर्नल, देश के एक प्रमुख समाचार पत्र ने ‘अंतर योग पितृ ऋण मुक्ति शिविर’ की विशिष्टता पर एक लेख प्रकाशित किया है। पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:https://tiny.cc/antaryog-prm-news
तपस्या
आचार्य उपेंद्रजी का बाल्यकाल से गहन और कठोर तपस्यात्मक जीवन
आचार्य जी से प्रकट होने वाली दिव्यता और तेजस्विता का अनुभव जो आज असंख्य साधक करते हैं, वे उनके जीवनभर की अनेक कठोर तपस्याओं का परिणाम है।
आचार्य जी ने २४ घण्टे लगातार बिना जल और भोजन के महाशक्तिशाली ‘महामृत्युञ्जय मन्त्र’ का जाप करते हुए गहन तपस्या की है।
आचार्य जी ने करोड़ों बार गणेश मन्त्रों का जाप और लाखों बार नवग्रह मन्त्रों का जाप पूर्ण किया हैं।
अडिग ध्यान के साथ आचार्य जी ने विश्व कल्याण के लिए लगातार १०० से अधिक बार हनुमान चालीसा का पाठ किया है।
इस प्रकार, आचार्य जी ने अनेक अन्य शक्तिशाली मन्त्रों पर गहन तपस्याएँ की है और विभिन्न योगिक शक्तियाँ प्राप्त की हैं।
सेवा
अंतर योग महादान - हमारे शास्त्रों के अनुसार अनगिनत सुपात्र जीवों की सेवा
आचार्य उपेंद्रजी के मार्गदर्शन में, अंतर योग नियमित रूप से 'महादान' का भव्य दिव्य आयोजन करता है।
आचार्य जी शास्त्रों के अनुसार दान देने की उचित विधि सिखाते हैं।
इस दान पद्धति का पालन करके, साधक अपने पूर्व जन्मों के कर्मों से मुक्त हो जाते हैं, जिससे वे समृद्ध और यशस्वी जीवन जीते है।
अपने समाज के नौ वर्गों – सन्यासी, ब्राह्मण, बच्चे, अनाथ, दिव्यांग, विवाहित महिलाएँ, गरीब, वरिष्ठ नागरिक और रोगग्रस्त व्यक्ति – की नियमित रूप से अन्न और अन्य जीवन आवश्यक वस्तुओं का दान देकर सेवा की जाती है। यह सेवा निःस्वार्थ प्रेम और एकात्मता की भावना से की जाती है।
आचार्य उपेंद्रजी कहते हैं, “यह संसार लेने वालों में नहीं, देने वालों में रुचि रखता है; इसलिए देने वाले बनो।”
साधना
ब्रह्मर्षि आचार्य उपेंद्रजी ने विश्व कल्याण के लिए शक्तिशाली दुर्गा सप्तशती बीज मन्त्र साधना की रचना की
ब्रह्मर्षि आचार्य उपेंद्रजी, जो दिव्य तन्त्र विद्या के सिद्ध विशेषज्ञ हैं, उन्होंने वर्षों की गहन ध्यान और तपस्या के माध्यम से कई शक्तिशाली और प्रभावी साधनाओं की रचना की है। ऐसी ही एक अद्भुत शक्तिशाली साधना है, ‘अंतर योग श्री दुर्गा सप्तशती तन्त्रोक्त बीज मन्त्र साधना।’
यह ७०० श्लोकों वाली शक्तिशाली साधना इतिहास की सबसे अद्वितीय रचनाओं में से एक मानी जाती है।
विश्व भर के हजारों साधक यह साधना कर रहे हैं, जो एक साथ शक्ति, समृद्धि और विवेकबुद्धि को आकर्षित कर रहे हैं।
तीन वर्षों की निरन्तर और कठोर तपस्या करके आचार्य उपेंद्रजी ने इस दिव्य साधना से योगिक सिद्धियाँ प्राप्त की हैं और अब वे इसे निःस्वार्थ भाव से संसार में प्रसारित कर रहे हैं।
आचार्य उपेंद्रजी कहते हैं कि यदि हमारे देश की कुल जनसंख्या के केवल २% लोग यह साधना सामूहिक और नियमित रूप से करें, तो महामारी जैसी आपदाएँ समाप्त होंगी, अपराध दर कम होगा और देश में धार्मिक सद्भावना बढ़कर शान्ति प्रस्थापित होगी।
चमत्कार
विशेष ज्ञान और साधना सत्रों के माध्यम से असङ्ख्य साधकों में त्वरित परिवर्तन लाना
ब्रह्मर्षि आचार्य उपेंद्रजी ‘अभी और यहीं’ परिणाम देने में विश्वास रखते हैं। लाखों साधकों ने आचार्य जी द्वारा आयोजित विशेष ज्ञान और साधना सत्रों में त्वरित परिणाम का अनुभव किया है।
ज्ञानसत्र, शिविर और अन्य कार्यक्रमों के दौरान, अनेक साधकों ने गहरी मानसिक शान्ति, चमत्कारी उपचार, आध्यात्मिक उन्नति, लम्बे समय से अटके हुए कार्यों का त्वरित समाधान, शत्रुओं का मित्रों में परिवर्तन, आर्थिक उन्नति और अन्य कई लाभों का अनुभव किया है।
आचार्य उपेंद्रजी कहते हैं, ‘यदि अंतर योग में चमत्कार न हों, तो यह आश्चर्य की बात है। चमत्कार देखकर मत झुको। यदि आप सम्पूर्ण शरणागति और श्रद्धा से झुकते हैं, तो आप स्वयं ही चमत्कारों का अनुभव करेंगे।’ यही कारण है कि अंतर योग में साधक निरन्तर चमत्कार देखते हैं।
ध्यान
हमारे भारत और उसके नागरिकों की रक्षा के लिए विनामुल्य सामूहिक ध्यान सत्र
पिछले चार वर्षों से, अंतर योग ऑनलाइन ध्यान और जाप सत्र आयोजित कर रहा है, जहाँ विश्व भर से लाखों साधक आचार्य उपेंद्रजी के साथ दैनिक ध्यान करने के लिए एकत्रित होते हैं।
आचार्य जी नियमित रूप से विश्व कल्याण के लिए समर्पित शक्तिशाली साधना सत्र, जैसे दुर्गा सप्तशती साधना, विश्व शान्ति ध्यान, महामृत्युञ्जय मन्त्र जाप, गणेश मन्त्र जाप और अन्य कई साधनाओं का आयोजन करते हैं।
इन सत्रों में भाग लेने वाले साधक मन:शान्ति, समृद्धि, असाध्य रोगों का उपचार, नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय आदि का अनुभव करते हैं, जो वे वेदान्त के ज्ञान और मोक्ष की जागृत इच्छा के माध्यम से प्राप्त करते हैं।
साधक इन सत्रों के माध्यम से कार्यक्षमता और ऊर्जा में वृद्धि सहित अन्य कई लाभ भी अनुभव कर रहे हैं।
युवा
भारत के सुवर्ण युग को पुनर्स्थापित करने के लिए हमारे राष्ट्र के मूलस्तम्भ युवा वर्ग में त्वरित परिवर्तन लाना
आचार्य जी युवाओं के भीतर छिपी असीम क्षमता को उजागर कर रहे हैं और उन्हें राष्ट्र कल्याण के लिए सक्षम बना रहे हैं।
बढ़ती हुई ब्रेन ड्रेन की समस्या को रोकने हेतु, आचार्य जी युवाओं में देशभक्ति की भावना जाग्रत कर रहे हैं और उन्हें उच्च उद्देश्यों की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
आचार्य जी प्रत्येक नागरिक में सनातन धर्म का गहरा ज्ञान सञ्चारित कर रहे हैं, जिससे ऐसी मानसिकता विकसित हो रही है जो धर्मों की सभी दीवारों को पार करने में सक्षम है। इससे लाखों नागरिकों के भीतर राष्ट्र के प्रति सच्चे प्रेम की भावना प्रज्वलित हो रही है।
आचार्य जी का युवा, गतिशील और मैत्रीपूर्ण व्यक्तित्व उन्हें युवाओं के लिए एक आदर्श प्रेरणास्त्रोत बनाता है।
संकल्प
हमारे देश के लिए दूरदर्शी नेताओं का निर्माण होने के उद्देश्य से गणेश कोटि मूल मन्त्र जप यज्ञ का भव्य संकल्प
जनवरी २०२४ से, आचार्य जी गणेश कोटी मूल मन्त्र जप यज्ञ सत्रों का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें सामूहिक रूप से ८ करोड़ से अधिक और व्यक्तिगत रूप से २ लाख से अधिक शक्तिशाली गणेश मूल मन्त्रों का जाप करने का दिव्य महा संकल्प किया है।
यह साधना ज्ञान वृद्धि, विवेकबुद्धि वर्धित करने, नेतृत्व गुणों को विकसित करने और जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने में अत्यन्त प्रभावी है।
यह सामूहिक तप हमारे देश के नागरिकों के लिए एक रक्षात्मक कवच तैयार कर रहा है, जो कठिन समय में सात्विक व्यक्तियों की सुरक्षा करता है।
नेतृत्व
हमारे देश के लिए असाधारण नेताओं का निर्माण
आज के समय में, भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए दृढ इच्छाशक्ति वाले शक्तिशाली नेताओं और नागरिकों का निर्माण करने की अत्यधिक आवश्यकता है।
आचार्य जी वाणिज्य, राजनीति और आध्यात्म जैसे क्षेत्रों में दूरदर्शी नेताओं का निर्माण कर रहे हैं, जो हमारे राष्ट्र के समग्र विकास के लिए समर्पित हैं और दृढ आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
आचार्य जी के प्रभावशाली ज्ञान और साधना सत्र नागरिकों को विकसित कर रहे हैं, जो निःस्वार्थ भाव से हमारे राष्ट्र की सेवा करने और उच्च नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के प्रति समर्पित हैं।
ब्रह्मचर्य
ब्रह्मचर्य के ज्ञान से हमारे देश के नागरिकों का परिवर्तन
ब्रह्मर्षि आचार्य उपेंद्रजी सभी आयु वर्ग के लोगों को ब्रह्मचर्य के महत्वपूर्ण सिद्धान्त सिखाते हैं, जिन्हें वे वैज्ञानिक प्रमाणों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से सरल और प्रभावी ढङ्ग से प्रस्तुत करते हैं, उससे तत्काल परिवर्तन होता है।
आज के समाज में, विवाहबाह्य सम्बन्ध, लिव-इन रिलेशनशिप, बहुविवाह और समलैंगिक विवाह जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जो हमारे देश की प्रगति में बड़ी गम्भीर बाधाएँ खड़ी कर रही हैं।
आचार्य जी की शिक्षाएँ, विशेष रूप से युवाओं में, ब्रह्मचर्य के प्रति फैली भ्रान्तियों और गलत धारणाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
महिलाएँ
सदियों से उत्पीड़ित महिलाओं के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण
ब्रह्मर्षि आचार्य उपेंद्रजी नियमित रूप से ऐसे प्रवचन करते हैं जो हजारों महिलाओं के लिए वेदान्त का मार्ग प्रशस्त करते हैं और उन्हें सक्षम, सशक्त, आत्मनिर्भर, स्वावलम्बी और करुणामय व्यक्तित्व बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
आचार्य जी की अनूठी शिक्षण शैली के कारण, आज की आधुनिक महिलाएँ भी प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान को सहजता से सिख रही हैं।
अंतर योग की संस्थापक, गुरुमाँ नीता ताई और रूपा ताई महिलाओं के लिए प्रेरणादायक आदर्श हैं और वे अनेकों महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, उन्हें सशक्त बना रही हैं।
भारत की सर्वांगीण प्रगति के लिए, अंतर योग देशभर में महिलाओं को सशक्त बनाने में अमूल्य योगदान दे रहा है।
समृद्धि
भारत को विश्व की आर्थिक महासत्ता बनाने की दिशा में कदम
आज के समय में, धनिक अधिक धनवान और निर्धन अधिक निर्धन होते जा रहे हैं। आचार्य जी पिछले २० वर्षों से निःस्वार्थ भाव से श्रीविद्या का ज्ञान हर घर तक पहुँचाने के लिए कार्यरत हैं, जिससे लाखों लोग तत्काल सफलता प्राप्त कर आर्थिक रूप से स्वतन्त्र जीवन जी रहे हैं।
धनिक और निर्धन के बीच का अन्तर बढ़ रहा है, फिर भी आचार्य जी की अद्भुत शिक्षाएँ और श्रीविद्या की दीक्षा इस अन्तर को कम करने में सहायक हो रही है।
भारत का गौरवशाली सुवर्ण काल पुनः स्थापित करने का आचार्य जी का दृष्टिकोण हमारे देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे रहा है।
आचार्य जी अर्थशास्त्र, आधुनिक निवेश तकनीकों आदि का ज्ञान सिखा रहे हैं, जिससे हमारे नागरिक असीमित धन आकर्षित कर आर्थिक रूप से स्वतन्त्र बन सकें।
किसान
हमारे देश भारत की प्रगति के आधारस्तम्भ किसानों को सशक्त बनाना
ब्रह्मर्षि आचार्य उपेंद्रजी ने एक अद्वितीय योगिक कृषि तन्त्र का प्रवर्तन किया है, जो फसल उत्पादन को दो से आठ गुना तक बढ़ा देती है।
इस नवीन विधि की क्षमता फसल उत्पादन को बढ़ाकर किसानों के आर्थिक बोझ को काफ़ी हद तक कम कर देगी, जिससे हमारे देश में व्याप्त किसानों की आत्महत्या की समस्या का समाधान होगा।
इससे सुखी, तनावमुक्त और समृद्ध किसान तैयार होंगे, जो सात्विक मानसिकता के साथ फसल का उत्पादन करेंगे।
ये पोषक, जैविक और शुद्ध उत्पादन हमारे नागरिकों को स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जीने में सक्षम बनाएंगे।
विज्ञान
अंधविश्वास मिटाने के लिए विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय
भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि आध्यात्मिक ज्ञान को विज्ञान और तर्क के साथ सिखाया जाना चाहिए।
यह सर्वविदित है कि हमारे पूज्यनीय ऋषि-मुनि और सन्त महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक दृष्टिकोण से सिखाया।
आचार्य जी हमारे शास्त्रों के पीछे का विज्ञान अन्य धर्मों के अनुयायियों को भी समझाते हैं। इसलिए, सभी धर्मों के अनुयायियों को सन्तोष का अनुभव होता हैं।
आचार्य उपेंद्रजी की यह क्रान्तिकारी शिक्षण पद्धति बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वालों और विभिन्न विचारधाराओं तथा विश्वासों के साधकों को उनके सभी प्रश्नों के उत्तर खोजने में सहायता करती है, जिससे वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा में आगे बढ़ते हैं।
आचार्य जी सभी आयु, लिंग, व्यवसाय, धर्म और विश्वास के लोगों के साथ सहजता से जुड़ जाते हैं।
उपचार
एक स्वस्थ और समृद्ध भारत के लिए समग्र उपचार पद्धति का प्रचार-प्रसार करना
आचार्य जी अपने विशेष सत्रों के माध्यम से समग्र उपचार का प्रचार-प्रसार करते हैं, जैसे कि "हीलिंग का विज्ञान", जिसमें प्राचीन उपचार तकनीकों और आधुनिक उपचार विधियों का सम्मिलन कर एक स्वस्थ और समृद्ध भारत की दिशा में कार्यरत हैं।
इन सत्रों में भाग लेने से, प्रतिभागी असाध्य रोगों से तत्काल और स्थायी उपचार प्राप्त करते हैं तथा अपने रोगों के मूल कारणों के बारे में आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित करते हैं।
लाखों साधक कैंसर, उच्च रक्तचाप, हृदय विकार, थायरॉयड, मधुमेह आदि गम्भीर रोगों के साथ-साथ फ्रोजन शोल्डर, सर्दी-जुकाम आदि सामान्य रोगों से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।
इन सत्रों के माध्यम से, साधक अपने स्वास्थ्य, धन, व्यवसाय, नातेसम्बन्ध और अन्य पहलुओं से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान प्राप्त करते हैं।
'साइंस ऑफ हीलिंग' सत्रों के दौरान लाखों प्रतिभागियों द्वारा अनुभव किए गए ‘अभी और यहीं’ परिणामों का रहस्य आचार्य जी की दिव्य उपचार शक्ति है।
हमारे यूट्यूब प्रसार माध्यम पर हमारे साधकों के शक्तिशाली आरोग्यकारी अनुभवों के साक्ष्य देखें:https://youtube.com/@AntarYogFoundationOfficial